रहस्यमय परछाइयाँ
चारों दोस्त डर के मारे एक-दूसरे से सट गए। अर्जुन ने हिम्मत जुटाकर कहा, "यह कोई मज़ाक है, हमें शांत रहना होगा।" विवेक ने टॉर्च की रोशनी चारों ओर घुमाई, तभी अचानक एक परछाई तेजी से गुज़री।
"वो क्या था?" कविता कांपती आवाज़ में बोली।
रीना ने दरवाजे की ओर देखा, लेकिन अब वहाँ घना अंधकार था। तभी, महल की ऊपरी मंज़िल से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे आ रहा हो।
"हमें यहाँ से निकलने का रास्ता खोजना होगा!" अर्जुन बोला। चारों ने महल के अंदर एक और दरवाजा खोजने की कोशिश की। चलते-चलते वे एक बड़े हॉल में पहुँच गए, जहाँ दीवारों पर कई रहस्यमय प्रतीक उकेरे गए थे।
हॉल के बीचोबीच एक पुराना लकड़ी का ताबूत रखा था। उस पर लाल रंग से कुछ लिखा हुआ था, जिसे पढ़ते ही रीना की आँखें चौड़ी हो गईं। "यह...यह लैटिन भाषा में कुछ लिखा है," उसने कांपते हुए कहा।
विवेक ने पास जाकर लिखा पढ़ने की कोशिश की— "मॉर्टस इन्फिनिटस," जिसका मतलब था "अनंत मृत्यु।"
जैसे ही उसने यह पढ़ा, ताबूत अपने आप हिलने लगा। अचानक, ताबूत का ढक्कन चरमराते हुए खुला और अंदर से एक भयावह आकृति निकल आई—उसकी आँखें खून जैसी लाल थीं और उसके लंबे, धारदार दाँत चाँदनी में चमक रहे थे।
चारों ने चीखकर भागने की कोशिश की, लेकिन महल के दरवाजे फिर से गायब हो चुके थे।
"नेक्स्ट भाग में और भी दिलचस्प मोड़ आने वाले हैं! आज का भाग कैसा लगा? अपनी राय कॉमेंट में ज़रूर बताएं।

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