गरज और चमक कैसे बनीं
एक समय की बात है कि किसी गाँव में एक बहुत सुंदर लड़की रहती थी। उसके लंबे और काले केश थे. आँखें चमकदार और शरीर की रंगत सुनहरी थी। गाँव के सभी लड़के उससे प्रेम करते और उससे विवाह करना चाहते थे, लेकिन जैसे ही वे उसके पास आते वह उन पर हँसती हुई बहुत दूर भाग जाती। वह इतना तेज भागती थी कि उसे पकड़ना किसी के लिए भी असंभव था।उस गाँव में लक्ष्मण नामक एक युवक भी रहता था। वह किसी अन्य गाँव से आया था। दूसरे युवकों की तरह वह भी उस लड़की की सुंदरता पर मोहित था। लड़की को वह अपनी जान से ज़्यादा चाहता था। एक बार वह उसके पिता के पास गया और लड़की का हाथ शादी के लिए माँगा। लड़की के पिता ने उससे कहा, "अगर तुम मेरे घर बारह वर्ष तक नौकर की तरह काम कर सकते हो, तो मेरी लड़की से शादी कर सकोगे।"
लक्ष्मण लड़की को बेहद चाहता था। वह उसके घर नौकर की हैसियत से काम करने लगा। धीरे-धीरे बारह साल बीत गए। लक्ष्मण अपने मालिक के पास गया और कहा, "मालिक, मैं आपके घर बारह साल काम कर चुका हूँ। आपने मुझे बारह साल बाद एक तोहफा देने का वचन दिया था। अब मैं वह तोहफा लेकर अपने घर जाऊँगा।"
उसका मालिक घर के एक कमरे से एक बहुत बड़ी गागर उठाकर लाया। गागर ढक्कन से अच्छी तरह ढकी हुई थी। मालिक ने गागर उसे सुपुर्द करते हुए बोला, "बेटा, इसे ले जाओ।" फिर कहा, "इसे केवल अपने घर जाकर ही खोलना। जैसा मैं कह रहा हूँ, बिलकुल वैसे ही गरज और चमक कैसे बनीं?
करना। नौकरी के दौरान तुमने मेरा हर कहा माना है। घर जाते ही तुझे तेरा तोहफा मिल जाएगा और सब ठीक होगा।"
लक्ष्मण ने मालिक से गागर ली और सिर पर उठाकर खुशी-खुशी अपने घर को चल दिया। घर तक का सफर लंबा था। उसे जंगल से होकर गुजरना था। वह अकेला था। अतः जल्दी-से-जल्दी सफर पूरा करना चाहता था। गागर में क्या होगा-यह देखने के लिए वह बड़ा उतावला हो रहा था, लेकिन उसे अपना वायदा याद आता और वह आगे बढ़ता जाता। अँधेरा होने से पहले वह घर पहुँचना चाहता था। 'घर जाऊँगा तभी मैं ढक्कन खोलूँगा। बारह साल तक मैंने वही किया, जो मालिक ने चाहा।' वह अपने आप से बातें करते हुए चला जा रहा था।
दोपहर को धूप तेज हो गई थी। गरमी के मारे लक्ष्मण का बुरा हाल हो रहा था। हर कदम पर गागर भी पहले से भारी लगने लगी थी। उसे यों लगा, मानो गागर में से कुछ आवाजें आ रही हों। वह सोचने लगा-'गागर में क्या हो सकता है? क्या इसमें मेरे मालिक की लड़की, मेरी जीवन-संगिनी है? पर नहीं। मेरे मालिक ने मुझे गागर में झाँकने को मना किया है। शीघ्र ही में घर पहुँच जाऊँगा और सब पता चल जाएगा।'
अब वह जंगल में तेज-तेज चलने लगा। गागर के बारे में भूलने के लिए कभी वह पक्षियों को देखता और कभी पेड़-पौधों को। लेकिन गागर उसके सिर पर भारी हो रही थी। 'मेरा ख़याल है कि मेरे मालिक की सुंदर लड़की इसमें ही है।' वह सोच रहा था। धीरे-धीरे अँधेरा भी गहराने लगा। 'सौ कदम चलकर मैं घर पहुँच जाऊँगा। क्या मैं गागर में हलका-सा झाँककर देख लूँ! झाँकने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मैं तुरंत ही उसे बंद कर दूँगा।' उसने सोचा। वह एक पत्थर पर बैठ गया और गागर अपने सामने रख ली। उसे महसूस हुआ कि वह एक लड़की के हँसने की आवाज सुन रहा है। यह बहुत ही मीठी और प्यारी आवाज थी। उसकी धड़कन तेज होती जा रही थी।
"मैं इसे खोलकर केवल झाकूँगा" यह कहते हुए लक्ष्मण ने गागर का ढक्कन थोड़ा ऊँचा करके उसमें झाँका। जैसे ही उसने ऐसा किया, ढक्कन उड़कर उसके चेहरे पर आ लगा। एक पल को उसकी आँखें बंद हो गईं।
जब उसने आँखें खोलीं तो एक लड़की रूपी बहुत तेज चमक आसमान में उड़कर जाती दिखी। वह उसकी पहुँच के बाहर, बहुत दूर, आकाश में बड़ी तेजी से चमक रही थी। लक्ष्मण ने ऐसी गलती कर दी, जिसके लिए उसके मालिक ने मना किया था। अपने सपनों की रानी को उसने सदा-सदा के लिए खो दिया।
"लौट आ, लौट आ!" जंगल में खड़ा वह चिल्लाए जा रहा था। आकाश की ओर लक्ष्मण ने बहुत सारे तीर भी चलाए, पर तीर केवल बादलों से ही टकराते रहे। लड़की उसकी ओर हँसती हुई देखती अपने चमकते हुए सफेद दाँत ही दिखाए जा रही थी।
"गरज को सुनो!" लोग बादलों की गर्जन को सुनकर अकसर कहते हैं- "ये लक्ष्मण के तीरों की बादलों से टकराने की आवाज है।" जब वे आकाश में बिजली चमकते हुए देखते हैं तो कहते हैं- "ये उसके मालिक की सुंदर लड़की है, जो उसके थोड़े-से उतावलेपन के कारण उसकी पत्नी नहीं बन सकी थी।"
वह आज भी उतनी ही सुंदर है, जितनी कि पहले थी। आज तक उसे कोई भी पकड़ नहीं सका। जब वह आसमान में चमकती है, हम-आप लक्ष्मण के तीरों की आवाज सुन सकते हैं। लेकिन वे तीर कभी उसकी बिछुड़ चुकी दुल्हन के पास नहीं पहुँच सके।

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