**विक्रम बेताल की पहली कहानी:**
प्राचीन समय की बात है, उज्जैन के राजा विक्रमादित्य बहुत ही न्यायप्रिय और महान राजा थे। उनकी बहादुरी और ज्ञान के किस्से चारों ओर मशहूर थे। एक दिन एक साधु उनके पास आया और उनसे कहा, "राजन, अगर आप मेरे लिए कुछ कर सकें, तो कृपया इस श्मशान घाट से एक बेताल को पकड़ कर लाएं। वह एक पेड़ से लटका हुआ है।"
राजा विक्रमादित्य ने साधु का आदेश मान लिया और बेताल को पकड़ने के लिए श्मशान घाट की ओर चल पड़े। वहाँ पहुँचने पर उन्होंने देखा कि बेताल एक बड़े पेड़ से उल्टा लटका हुआ है। राजा ने बिना डरे बेताल को पकड़ लिया और उसे कंधे पर उठाकर साधु के पास ले जाने लगे।
रास्ते में बेताल ने राजा से कहा, "राजन, मैं आपको एक कहानी सुनाऊंगा। अगर आपने कहानी सुनने के बाद उत्तर दिया, तो मैं वापस पेड़ पर चला जाऊंगा। लेकिन अगर आप चुप रहे, तो मैं आपके साथ चलूंगा।"
राजा विक्रमादित्य ने स्वीकृति दी।
**पहली कहानी:**
एक नगर में एक ब्राह्मण परिवार रहता था। उस ब्राह्मण की एक सुंदर कन्या थी जिसका नाम पद्मावती था। जब वह विवाह योग्य हुई, तो उसके पिता ने उसका विवाह एक योग्य ब्राह्मण युवक से कर दिया। विवाह के कुछ समय बाद, एक दिन पद्मावती का पति तीर्थ यात्रा पर गया और लौटकर नहीं आया।
कुछ समय बाद, एक दूसरे नगर से एक राजकुमार आया, जिसने पद्मावती को देखा और उससे विवाह का प्रस्ताव रखा। पद्मावती ने उसे बताया कि उसका पति तीर्थ यात्रा पर गया है और जब तक वह नहीं लौटता, वह दूसरा विवाह नहीं कर सकती। लेकिन राजकुमार ने जोर देकर कहा और आखिरकार पद्मावती ने विवाह के लिए हाँ कर दी।
शादी के बाद, राजकुमार पद्मावती को अपने नगर ले गया। कुछ समय बाद, पद्मावती का पूर्व पति लौट आया और उसने अपनी पत्नी को न पाकर उसके माता-पिता से पूछा। उन्होंने सारा हाल सुनाया। ब्राह्मण युवक राजकुमार के नगर गया और वहाँ उसने अपनी पत्नी को देखा। अब पद्मावती किसके साथ रहे, अपने पहले पति के साथ या नए राजकुमार के साथ?
यह कहानी सुनाने के बाद बेताल ने राजा से पूछा, "राजन, अब तुम बताओ, पद्मावती का सच्चा पति कौन है?"
राजा विक्रमादित्य ने उत्तर दिया, "पद्मावती का सच्चा पति वही है, जिससे उसने पहले विवाह किया था। दूसरा विवाह तब किया जब उसे लगा कि उसका पति अब नहीं लौटेगा।"
यह उत्तर सुनते ही बेताल ने कहा, "तुमने उत्तर दिया, इसलिए मैं फिर से पेड़ पर चला जाऊंगा," और बेताल राजा के कंधे से उड़कर वापस पेड़ पर जा लटका।
इस प्रकार बेताल फिर से पेड़ पर चला गया और राजा विक्रमादित्य को उसे पुनः पकड़ने के लिए लौटना पड़ा।
और इस तरह विक्रम और बेताल की कहानि
यों की श्रृंखला शुरू हुई।



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