विद्या: सबसे बड़ा धन
गाँव के एक छोटे से कस्बे में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके माता-पिता गरीब थे, लेकिन उन्होंने उसे हमेशा एक बात सिखाई थी—"विद्या सबसे बड़ा धन है, जो कोई छीन नहीं सकता।"
अर्जुन की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन पढ़ाई में उसकी रुचि गहरी थी। गाँव में एक ही सरकारी स्कूल था, जहाँ वह सुबह-शाम मेहनत करता और बाकी समय खेतों में अपने पिता के साथ काम करता।
एक दिन, गाँव में एक बड़े व्यापारी आए, जो होनहार बच्चों को छात्रवृत्ति देने का अवसर लेकर आए थे। परीक्षा कठिन थी, लेकिन अर्जुन ने बिना किसी संसाधन के अपनी मेहनत और लगन से उसे पास कर लिया। उसे शहर में पढ़ने का अवसर मिला।
वहाँ जाकर अर्जुन ने अपनी विद्या को ही सबसे बड़ा धन माना और खूब मेहनत की। कुछ वर्षों बाद, वह एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक बना और अपने गाँव लौटा। उसने अपने गाँव में एक बड़ा विद्यालय बनवाया, जहाँ गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती थी।
जब लोग उससे उसकी सफलता का राज पूछते, तो वह मुस्कुराकर कहता—
"धन तो परिस्थिति के अनुसार आता-जाता है, लेकिन विद्या हमेशा हमारे साथ रहती है। यही सबसे बड़ी
दौलत है।"

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें